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अमेरिका में ऊंचे शुल्क की बाधा के बाद भी 2025-26 में वहां बढ़ा भारत का इंजनियरिंग वस्तु निर्यात

अमेरिका में ऊंचे शुल्क की बाधा के बाद भी 2025-26 में वहां बढ़ा भारत का इंजनियरिंग वस्तु निर्यात

नई दिल्ली, अमेरिका में भारत के विरुद्ध ऊंचे शुल्क की बाधाओं के बावजूद वहां के लिए भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात में 2025-26 में वार्षिक आधार पर वृद्धि दर्ज की गई है ।

भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी-इंडिया) ने गुरुवार को कहा कि क्षेत्रीय मजबूती, बाज़ार विविधीकरण और लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों का संयोजन निर्यात की गति बनाये रखने और दीर्घकालिक निर्यात लक्ष्यों की दिशा में प्रगति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

भारत के इंजीनियरिंग निर्यात पर ईईपीसी के एक विश्लेषण में कहा गया है कि अमेरिका की ट्रम्प सरकार द्वारा लगाये गये उच्च सीमा शुल्क के बावजूद, मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष में अमेरिका भारतीय इंजीनियरिंग वस्तुओं का शीर्ष गंतव्य बना रहा, जहां निर्यात 2.3 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ 19.60 अरब डॉलर तक पहुंचा।

ईईपीसी ने कहा है कि यह रुझान इस क्षेत्र की मजबूती और निर्यातकों की लगातार चुनौतियों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है। भारत के इंजीनियरिंग समान के 25 प्रमुख देशों में से, दूसरे सबसे बड़े बाज़ार संयुक्त अरब अमीरात ( यूएई ) और चौथे सबसे बड़े बाज़ार सऊदी अरब को पिछले वित्त वर्ष में क्रमशः 10 प्रतिशत और 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार वर्ष के दौरान जर्मनी, ब्रिटेन, चीन, इटली, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, श्रीलंका और मलेशिया के लिए इंजीनियरिंग निर्यात बढ़ा है।

देश का इंजीनियरिंग वस्तु निर्यात वर्ष के दौरान कुल मिला कर 122.43 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह इससे पिछले वित्त वर्ष के 116.75 अरब डॉल से 4.86 प्रतिशत अधिक है।

मार्च 2026 में ईरान युद्ध और उसके बाद होरमुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से आपूर्ति में भारी बाधाओं के बावजूद, इंजीनियरिंग निर्यात में 1.13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। मार्च 2026 में यह निर्यात 10.94 अरब डॉलर रहा, जो मार्च 2025 में 10.82 अरब डॉलर था।

वाणिज्यिक खुफिया एवं सांख्यिकी महानिदेशालय द्वारा परिभाषित 34 उत्पाद श्रेणियों के निर्यात में वर्ष 2025-26 में वार्षिक रूप से वृद्धि हुई, जबकि केवल 8 में गिरावट दर्ज की गई।

मार्च 2026 में ईरान युद्ध के बीच पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (वाना) क्षेत्र को निर्यात होरमुज़ के बंद होने से उत्पन्न आपूर्ति शृंखला समस्याओं के कारण 50.7 प्रतशत तक गिर गया। आलोच्य अवधिक में में यूएई और सऊदी अरब जैसे प्रमुख निर्यात गंतव्यों को निर्यात इस अवधि में क्रमशः 67 प्रतिशत और 45 प्रतिशत घटा।

यूएई एक व्यापार-ट्रांसशिपमेंट हब होने के कारण कई भारतीय निर्यातकों के वहां गोदाम हैं, जहां से यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका को आगे व्यापार किया जाता है। क्षेत्र में हालिया भू-राजनीतिक संघर्षों का इन गोदाम गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

निर्यात आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात ने लगातार दूसरे वर्ष रिकॉर्ड मूल्य हासिल कर उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। उन्होंने कहा, “निर्यात वृद्धि ऐसे समय में हुई जब वैश्विक व्यापार मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहा था, जिससे क्षेत्र के प्रमुख समुद्री मार्गों में से एक अवरुद्ध हो गया। इन बाहरी दबावों के बावजूद पिछले वित्त वर्ष के दैरान उत्तर अमेरिका, यूरोप, लैटिन अमेरिका आदि में भारत का कुल इंजीनियरिंग निर्यात सकारात्मक बना रहा। केवल वाना में निर्यात संघर्ष के सीधे प्रभाव के कारण प्रभावित हुआ। यह शानदार प्रदर्शन हमारे निर्यात समुदाय की दृढ़ता और संकल्प का प्रमाण है।”

उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष की उपलब्धि 2030 तक 250 अरब अमेरिकी डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। सरकार के सही समय पर नीतिगत समर्थन की सराहना करते हुए श्री चढ्ढा ने कहा कि वर्ष के दौरान घोषित नीतिगत उपायों, जिनमें 497 करोड़ रुपये के प्रावधान वाली ‘रेज़िलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ)’ योजना शामिल है। इस योजना ने पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अमेरिकी क्षेत्र के संकट के दौरान व्यापार निरंतरता बनाये रखने में योगदान दिया। इस योजना का उद्देश्य युद्ध जोखिम बीमा, बीमा प्रीमियम में उतार-चढ़ाव और बढ़ी हुई लॉजिस्टिक्स लागत जैसी समस्याओं का समाधान करना है।

ईईपीसी अध्यक्ष ने कहा, “आने वाले समय में उद्योग क्षेत्रों की मजबूती, बाज़ार विविधीकरण और लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों का संयोजन निर्यात की गति बनाये रखने और दीर्घकालिक निर्यात लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।”

सरकार के त्वरित अनुमानों के अनुसार, इंजीनियरिंग वस्तुएं माल निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा है। वर्ष 2025-26 में कुल निर्यात में इंजीनियरिंग निर्यात का हिस्सा 27.71 प्रतिशत रहा, जबकि मार्च 2026 में यह 28.11 प्रतिशत तक पहुंच गया।

वर्ष के दौरान उत्तरी अमेरिका को इंजीनियरिंग निर्यात 1.9 प्रतिशत बढ़ा और यूरोपीय संघ के बाजार में वृद्धि 8.6 प्रतिशत रही। वाना, अन्य यूरोपीय बाजार और रूस से अलग हुए मध्य एशियाई क्षेत्र (सीआईएस) को छोड़कर सभी क्षेत्रों में निर्यात बढ़ा। वाना को निर्यात में 8 प्रतिशत, अन्य यूरोपीय बाजार में तथा सीआईएस में इंजीनियरिंग निर्यात क्रमशः 4.5 प्रतिशत और 5.9 प्रतिशत कम हुआ।

सियासी मियार की रीपोर्ट