सेंटकॉम ने ईरान की नाकाबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस लौटने का दिया निर्देश

वाशिंगटन, 25 अप्रैल। ईरान के खिलाफ अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकाबंदी को और कड़ा कर दिया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने गुरुवार को पुष्टि करते हुए कहा कि उसने ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है। वापस लौटने के लिए मजबूर किए गए अधिकांश जहाजों का तेल टैंकर होने की पुष्टि हुई है।
सेंटकॉम ने आज एक परिचालन संबंधी अपडेट जारी करते हुए बताया कि समुद्री प्रवर्तन अभियानों में अब तक के उच्चतम स्तर का सहयोग देखने को मिला है जिसमें अधिकांश जहाज अमेरिकी सेना के निर्देशों का सख्ती से पालन कर रहे हैं।
सेंटकॉम ने अपने व्यापक अभियान के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि इसमें 17 युद्धपोतों और 100 से अधिक विमानों के समर्थन से 10,000 से अधिक अमेरिकी सैन्यकर्मी शामिल हैं, जो इस बात को रेखांकित करता है कि वाशिंगटन ने समुद्र में तेहरान पर दबाव बनाने के लिए बहुत हद तक प्रयास किया है।
अमेरिकी नौसैनिकों की अत्यधिक उपस्थिति ने अनिश्चितताओं को और बढ़ा दिया है जिससे खाड़ी में तनाव सीधे तौर पर बढ़ रहा है। एक दिन पहले ही, ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी की और उनमें से दो को जब्त कर लिया। यह घटना नाकाबंदी शुरू होने के बाद से सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है जिसने अनिश्चित काल के लिए बढ़ाए गए युद्धविराम की स्थिति को और भी खराब कर दिया है।
वाशिंगटन में संदेश लगातार एक जैसा ही रहा है क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने दोहरी नीति अपनाई है, एक तरफ तेहरान पर स्पष्ट राजनयिक बातचीत के लिए दबाव डाल रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस्लामिक गणराज्य पर भारी सैन्य दबाव बनाए हुए है हालांकि ईरान ने सैन्य धमकियों के साये में बातचीत करने से इनकार कर दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नाकाबंदी का उद्देश्य तेहरान को एक अधिक एकीकृत और प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर करना है, जबकि दीर्घकालिक समाधान के लिए बातचीत जारी है।
इस मामले पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि मौजूदा युद्धविराम के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं है और यह भी बताया कि इसका विस्तार अनिश्चित काल के लिए है। साथ ही उन्होंने कहा कि बैक-चैनल से बातचीत जारी रहने के कारण अधिक सतर्क दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।
हालांकि, सुश्री लेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्थाई समझौते के लिए ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को छोड़ना होगा। यह एक ऐसी मांग है जिसका तेहरान ने बार-बार विरोध करता रहा है।
इसलिए, फिलहाल यह युद्धविराम सशर्त बना हुआ है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि जब तक ईरान एक औपचारिक प्रस्ताव पेश नहीं करता और बातचीत किसी ठोस नतीजे की ओर नहीं बढ़ती, तब तक नाकाबंदी लागू रहेगी।
इसके जवाब में, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नाकाबंदी को युद्ध कृत्य और युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी है कि ईरान इस जबरदस्ती के दबाव के खिलाफ कड़ा जवाब देगा।
फिर भी, सुश्री लेविट ने इस बात पर बल दिया कि किसी भी स्थाई समझौते के लिए एक अपरिवर्तनीय शर्त यह होगी कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के पूरे भंडार को सौंपने के लिए सहमत हो।
सियासी मियार की रीपोर्ट
Siyasi Miyar | News & information Portal Latest News & Information Portal